(N/A) नाइट्रोजन का असामान्य व्यवहार निम्नलिखित कारणों से है:
$(i)$ छोटा आकार
$(ii)$ उच्च विद्युत ऋणात्मकता
$(iii)$ उच्च आयनन एन्थैल्पी
$(iv)$ $d$-कक्षकों की अनुपस्थिति
$1$. नाइट्रोजन $p\pi-p\pi$ बहु-आबंध बनाने की अपनी क्षमता के कारण द्विपरमाणुक $(N_2)$ गैसीय अणु के रूप में मौजूद होता है,जबकि समूह के अन्य तत्व बड़े परमाणु आकार और प्रभावी $p\pi-p\pi$ आबंध बनाने में असमर्थता के कारण ठोस होते हैं।
$2$. नाइट्रोजन में स्वयं के साथ और ऑक्सीजन तथा कार्बन जैसे छोटे,उच्च विद्युत ऋणात्मक तत्वों के साथ $p\pi-p\pi$ बहु-आबंध बनाने की अनूठी क्षमता होती है। भारी तत्व एकल आबंध ($P-P$,$As-As$,$Sb-Sb$) बनाते हैं क्योंकि उनके परमाणु कक्षक बहुत बड़े और विसरित होते हैं।
$3$. नाइट्रोजन में श्रृंखलन (catenation) की प्रवृत्ति कमजोर होती है क्योंकि $N-N$ एकल आबंध $P-P$ आबंध की तुलना में कमजोर होता है,जिसका कारण नाइट्रोजन परमाणुओं के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों के बीच प्रबल अंतर-इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण है।
$4$. नाइट्रोजन अपनी सहसंयोजकता को $4$ से आगे नहीं बढ़ा सकता क्योंकि इसकी संयोजी कोश में $d$-कक्षकों का अभाव होता है,इसलिए यह $PCl_5$ जैसे पेंटावेलेंट यौगिक नहीं बना सकता।
$5$. नाइट्रोजन $d\pi-p\pi$ आबंध नहीं बना सकता,जबकि भारी तत्व संक्रमण धातुओं या ऑक्सीजन के साथ ऐसे आबंध बना सकते हैं (उदा.,$R_3P=O$)।
$6$. $NF_3$ को छोड़कर नाइट्रोजन के ट्राईहैलाइड्स अस्थिर होते हैं,जबकि समूह-$15$ के अन्य तत्वों के ट्राईहैलाइड्स स्थिर होते हैं।